Karnpisachini Brahmarakshah aur भूत से काम करवाता हूँ Rudranath Horror

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Karnpisachini Brahmarakshah aur आपका कभी आमनासामना हुआ है किसी कर्ण पिशाचनी से? जब तक आप उसे किसी कार्य में नहीं लगाओगे, वो आपके कंध

Karnpisachini Brahmarakshah aur आपका कभी आमनासामना हुआ है किसी कर्ण पिशाचनी से? जब तक आप उसे किसी कार्य में नहीं लगाओगे, वो आपके कंधे पर बैठकर फुसफुसाती रहेगी। हमने इनके दर्शन जरूर करे थे। वो पूरा रक्त में सना रहता था। मतलब उसे देख के भी हम भी कई बार कहते थे इतना भयंकर महाराज जी कहां ले चलते रहते हैं उसे।

कई लोग कहते हैं कि बागेश्वर धाम के पास कर्ण पिशाच नहीं है। जहां हनुमान जी की सेवा होती है। वहां पिशाच क्या करेगा? वहां वो हनुमान जी की सेवा करेगा। वो कुछ और नहीं कर सकता। एक लड़का था 27 28 साल का। YouTube पे साधना देखी और बैठ गया। रात्रि में 11:00 बजे के बाद सरसों के तेल का दिया लगाना तो चीजें उसे दिखने लग गई। इतना परेशान हो गया कि साधना करते हुए अपना देह भी त्याग देते थे। गलत Karnpisachini Brahmarakshah aur

मेहंदीपुर बालाजी के प्रसाद को अगर घर लाए तो प्रसाद में प्रेत आपके साथ घर आ जाएगा। पहले के समय में प्रसाद लाना मना ही था। Karnpisachini Brahmarakshah aur

अभी भी वैसे नहीं लाते हैं वो। नहीं लाने हैं।

शव के ऊपर बैठकर वो साधना होती है। क्या सच में शव खड़ा हो जाता है? साधना के समय?

उसके ऊपर मंत्र जाप किए जाते हैं तो एक समय ऐसा आता है वो बैठ जाता है। मंत्रों में इतनी ताकत है कि वो ब्रह्मांड को भी रोक सके। Karnpisachini Brahmarakshah aur

कोई रियल एक्सपीरियंस बताएंगे जिसमें हनुमान जी वर्सेस कोई डार्क एंटिटी हो।

एक जगह गए थे हम वहां पे डार्क एंटिटी बहुत डार्क थी। तो तब हमने बजरंग बाण का प्रयोग किया। जब वो निकला है तब उसने मुंह खोला है कि मैं वचन तोड़ता हूं और मैं जाऊंगा रास्ता बता रहा हूं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

मुस्लिम एंटिटी है जिन बोलते हैं। आपने देखा है कभी इन एंटिटीज को सर?

आपको इन्हें देखना है तो मैं रास्ता भी बता देता हूं। कोई मस्जिद हो, पुरानी हो, टूटी हुई हो।

दोस्तों, शास्त्रों में कहा गया है कि पितृ पक्ष पितरों को याद करने, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए सबसे पवित्र समय है। कहा जाता है कि इसका सबसे पहला और सबसे आखिरी दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर श्री मंदिर, पितृदोष निवारण महापूजा करवा रहा है। एक साथ पांच पवित्र स्थलों पर गोकर्ण, गंगा घाट, रामेश्वरम, पिशाच मोचन कुंड और काशी गंगा आरती। इसके अलावा पितृ पक्ष के किसी भी दिन आप काशी, गया, रामेश्वरम, गोकर्ण जैसे तीर्थ स्थलों पर पितृ शांति पूजा, नारायण बलि, नागबलि और तिल तर्पण करवा सकते हैं। माना जाता है कि इन अनुष्ठानों से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वंशजों को सुख शांति का आशीर्वाद मिलता है। इस पितृ पक्ष आप अपने पितरों को श्रद्धा समर्पित कीजिए।

हेलो सर। वेलकम टू द पडकास्ट। कैसे हैं सर आप?

मैं अच्छा हूं। जय भगवती जय। जय भगवती जय गुरुदेव

जय गुरुदेव सर आज हम काफी सारे टॉपिक्स पर बात करने वाले हैं लेकिन स्टार्टिंग मैं करना चाहती हूं थर्ड आई से जब भी कोई इंसान स्पिरिचुअलिटी में आता है स्पिरिचुअलिटी की बात करता है एक गोल रहता ही है कि मुझे ना अपनी थर्ड आई ओपन करनी है सर आप बताएंगे कि थर्ड आई ओपन कैसे कर सकता है कोई इंसान और अगर कर ली तो उससे क्या होगा?

सबसे पहले तो यह बात समझो कि हमारे शरीर में चक्र कितने हैं? सप्तचक्र का शरीर है यह। ठीक है। मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपुरा अनाहता ठीक है। उसके बाद विशुद्धि फिर थर्ड आई आता है और फिर सहस्त्र चक्र आता है। सात चक्र हो गए। जब तक आप बेस से शुरू नहीं करोगे आप डायरेक्ट थर्ड आई पे जाओगे तो वो कहीं ना कहीं आपको इफेक्ट करेगा। गुड परिणाम की जगह बैड परिणाम आने लगेंगे। आप उसकी ऊर्जा झेल नहीं सकते हो। आपको विज़ंस अगर दिखने लग गए, आप समझ ही नहीं पा रहे हो यह दिख क्यों रहा है। ठीक है? वो कहीं ना कहीं फिर आपके माइंड पे ज्यादा असर डालेगा। हम ठीक है? तो पहले उन्हें बेसिक करने चाहिए। Karnpisachini Brahmarakshah aur

अपने बेसिक चेक जो मूलाधार है मूलाधार पे काम करें। फिर स्वाधिष्ठान पे काम करें। फिर मणिपुरा पे काम करें। फिर अनाहत पे काम करें। फिर विशुद्धि पे काम करें। उसके बाद अपना थर्ड आई पे और सहरस्त्र पे काम करें। हम डायरेक्ट आप देखिए आपने पहली सीढ़ी पे पैर नहीं रखा और आप सीधा सातवीं छठी सीढ़ी पे पैर रख रहे हो तो उसका इफेक्ट कैसा होगा? तो यह चीज जानना बहुत जरूरी है और थर्ड आई एक्टिवेट होने के बाद जिनकी एक्टिवेशन हो जाती है थर्ड आई ठीक है वो इस लोक से परे देख सकते हैं हम हर एक चीज का अपना देखो हमारा मृत्यु लोक है ठीक है Karnpisachini Brahmarakshah aur

इस प्रकार अपने दूसरे ग्रह चले जाओ नवग्रह हैं जो उनके अपने-अपने रूल्स हैं है ना प्लनेट्स के भी केतु अपना अलग फल देता है शनि अपना अलग फल देता है ठीक है ऐसे ही पाताल लोक का अपना नियम है स्वर्ग स्वर्ग लोक का अपना नियम है। शिवलोक का अपना नियम है। ऐसे ही ये जो दूसरी दुनिया है हमारे बीच में इनका अपना अलग नियम है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम तो अगर थर्ड आई ओपन कर ली है तो क्या वो जितनी एंटिटीज हैं जिनको हम नॉर्मल आई से नहीं देख सकते उस उनसे वो कनेक्ट करने लग जाएगा इंसान। Karnpisachini Brahmarakshah aur

उससे बहुत ज्यादा हो जाता है। थर्ड आई एक्टिवेशन का अर्थ होता है कि आप अपने भूत को भी देखने में संभव हो जाते हैं। वर्तमान को भी आप समझने लग जाते हैं और भविष्य आपको दिखने लग जाता है। कई बार ऐसा होता है कि लोगों को पहले होने वाली घटनाएं पहले ही दिखने लग जाती हैं। ठीक है? उसका ईस्ट उसे दिखने लग जाता है। ठीक है? आंख बंद करते उसे महसूस होती हैं चीजें। ठीक है? और खुली आंखों का वाइब्रेशन इतना तेज नहीं होता है जितना वो त्रिनेत्र का तेज होता है। खुली आंखों से आप उतना देख सकते हो जितनी इसकी देखने की क्षमता है। लेकिन तीसरे नेत्र की वो क्षमता है जो हमारी सोचने की क्षमता से भी ज्यादा देख दिखाता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो जैसे अभी आपने कहा कि वो भूत भी देख सकते हैं। तो इसका मतलब क्या वो पास्ट लाइफ भी देख सकते हैं अपनी ज्यादा।

बिल्कुल देख सकते हैं। लेकिन इसका एक नियम होता है। गुरु समझाता है कि किस तरीके से जाना है। अगर आप पहुंच गए उस चेतना में तो वापसी कैसे आओगे? Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओके।

मतलब ऐसा भी कई बार होता है कि लोग वहीं फंस चुके हैं।

बिल्कुल। कई बार हो जाता है। वो अटक जाते हैं। इसलिए कहा गया है कि इसे ज्यादा से ज्यादा आप 15 मिनट तक आप एस्ट्रल ट्रैवल कर सकते हो। नहीं तो वापसी अपनी बॉडी में आना पड़ेगा। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम ओके।

हम तो जो एस्ट्रल ट्रेवल करना जानता है वो इस चीज को समझता है। वो किसी भी जगह किसी भी समय पहुंच सकता है।

ओके

तो जैसे अभी आपने कहा वो किसी भी जगह पहुंच सकता है। मैंने एक बुक रीड करी थी उसमें उन्होंने बताया था कि वो एस्ट्रल ट्रेवल करके वो कैलाश पर्वत उन्होंने देखा। एंड ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ इमेजिन कर रहे हैं। वो रियल में कैलाश पर्वत उन्होंने पर गए। वहां के वहां पे जो साधु थे उनसे मिलकर आए थे। एस्ट्रल ट्रैवल करके। Karnpisachini Brahmarakshah aur

एस्ट्र ट्रैवल जब आप करते हो कैलाश मानसरोवर की तो यात्रा होती ही है। आप किसी भी ग्रह पर भी जा सकते हो। जो ऊपर हमारे अंतरिक्ष में कुछ सिद्ध योगी महापुरुष हैं जो सप्त ऋषि में भी हैं जो कुछ ऐसे ऋषिज हैं जो ज्ञान महापर्व ऊपर ध्यान में बैठे हुए हैं। सहस्त्र सालों से हम ठीक है? आकाशिक रिकॉर्ड्स जो बताए गए हैं। वो भी वहीं पर हैं ऊपर। ठीक है? तो वो कैसे पता चलते हैं? जब आप वहां ट्रैवल करते हो हम नहीं तो आप पता कैसे करोगे Karnpisachini Brahmarakshah aur

मतलब हम जो यह कैलाश पर्वत है या फिर जो आकाश आकाशचारी ऋषि मुनि है उनसे भी कनेक्ट कर सकते हैं हम

बिल्कुल कर सकते हो लेकिन इसके लिए आपके अंदर की जो ऊर्जा है और जो लगन है वो इतनी गहराई से होनी चाहिए कि आप उस अवस्था को प्राप्त कर चुके हो हम इसके लिए सबसे जरूरी होता है आपके आसन का सिद्ध होना ठीक है जब तक आसन सिद्ध नहीं होगा आपकी चेतना अब चेतना कैसे समझ आएगी? हम ठीक है ना? तो इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है आसन पे सिद्ध होना। आप एक आसन में बैठ गए। तो आसन सिद्ध का मतलब यह नहीं है कि आपने मंत्र जाप करने हैं। आपने इतना जाप करना है। आसन सिद्ध का अर्थ यह होता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

कि आप मिनिमम थ्री आवर्स बिना हिले हुए एक सिचुएशन में एक पोजीशन में बैठे हुए हो। आंख बंद करके। वो आसन सिद्ध कहलाता है। हम ठीक है। अब क्या होता है? लोग समझते हैं कि आसन सिद्ध हमने माला घुमाई तो होगा। नहीं आसन सिद्ध है कि आपकी बॉडी और माइंड स्थिर हो गया एक अवस्था में। ठीक है? फिर जब आप एक अवस्था में स्थिर हो जाते हो तो तब आप कनेक्शन करते हो ऊपर वाले से परम तत्व से। ठीक है ना? जब आप परम तत्व से कनेक्शन करते हो तो आपको अनुभव होने लगते हैं। अब यहां क्या होता है? हम आधा घंटा बैठे या तो पैर सो गया या कहीं इचिंग होने लग गई तो हमारा ध्यान जो कनेक्ट होना था वह डायवर्ट हो गया। क्लियर हुआ आपको? Karnpisachini Brahmarakshah aur

जी जी सर आपने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन करा है। सर यहां से मैं कन्वर्सेशन थोड़ा सा डाइवर्ट करना चाहती हूं। आपने अपने पिछले पॉडकास्ट में कर्ण पिशाचिनी के बारे में बहुत इंफॉर्मेशन दी है। मैंने आपके पॉडकास्ट देखे हैं। तो मैं इस टॉपिक पर तो नहीं जाना चाहूंगी कि कर्ण पिशाचिनी क्या होती है। सर आपका कभी आमनासामना हुआ है किसी कर्ण पिशाचिनी से।

देखिए आमनासामना की तो बात नहीं है बट हमारे साथ जो हमारे मित्र थे उनके पास थी ये चीज हम ठीक है ना तो उसकी जो एनर्जी है ना वो अपने को समझ नहीं आती क्यों कहीं ना कहीं उसका 24 घंटे कान में फुसफुसाते रहना ठीक है आप किसी चीज को कितना सुन लोगे जब तक आप उसे किसी कार्य में नहीं लगाओगे वो आपके कंधे पे बैठ के फुसफुसाती रहेगी हम ठीक है आप इयर बर्ड्स लगा के कितनी देर आप सुन सकते हो भजन को या गानों को या किसी भी चीज को जो आप सुनना पसंद करते हो एक घंटा 1ढ़ घंटा 2 घंटा ज्यादा से ज्यादा मूवी देख ली तो 3 घंटा अगर वही चीज आपके 24 * 7 चले तो कैसा होगा और दूसरी चीज वो आपका भूत भवा बता सकती है भविष्य वर्तमान नहीं बताएगी अच्छा तीसरी चीज कोई देवी की सेवा करता है महादेव की सेवा करता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो उसके बारे बारे में वह बिल्कुल नहीं बताएगी। अच्छा ओके। ठीक है। तो ये चीज है। अब देवी से बड़ा कौन है? जो जगत जननी है वो एक पिशाचनी है। उन्हीं के अंतर्गत आती है। उन्हीं की सेवा में भूत प्रेत पिशाच किन के साथ चलते हैं? महादेव और देवी महाकाली के साथ रहते हैं। है ना? तो ये चीज समझने वाली है। तो अगर कोई देवी का साधक है या महादेव का साधक है या ऊंची अवस्था के जो हमारे देव देवी हैं, नरसिंह देव हैं। ठीक है ना? त्रिदेव में से कोई भी ले लो आप हनुमान जी ले लो यह नहीं यह दूर से ही उनके भक्तों से दूर रहती है Karnpisachini Brahmarakshah aur

दूर रहती है उनके बारे में ना कुछ बताएगी और उनसे दूर रहेगी हम अब कई लोग हैं अपने शरीर पे प्रेत बुला के देते हैं बुझा बुझा समझते हैं आप किसी के बारे में बताना हम ठीक है तो अब लोग सोचते हैं वो भगवान बता रहा है देव बता रहा है क्योंकि वो उस दुनिया से है वो आपका हमारा सबका काला चिट्ठा जानते हैं। उनके पास ज्ञान है। इसलिए वो बताते हैं। वो कहीं भी ट्रैवल कर सकते हैं क्योंकि ऊर्जा है वो। हम ठीक है? ऊर्जाएं दो प्रकार की बताई गई है। एक नकारात्मक, एक सकारात्मक। नकारात्मक के बिना सकारात्मक का अस्तित्व नहीं है Karnpisachini Brahmarakshah aur

और सकारात्मक का नकारात्मक के बिना अस्तित्व नहीं है। यह साइंस भी मानता है। जब आप बिजली का बटन ऑन करते हो तो उसमें एक वायर जो होती है नेगेटिव होती है और एक पॉजिटिव होती है। तो लाइट जलती है। जी। नहीं तो वह भी ना जले। ठीक है? तो दोनों एक दूसरे के पूरक है। तीन गुणों को अगर समझोगे आप एक सतोगुण, एक रजोगुण, एक तमोगुण। यही बैलेंस करते हैं आधार। ठीक है? और ये तीनों गुण किस में आते हैं? रजोगुण आ गए। है ना? राजा, महाराजा राजयोग जिसका लिखा हुआ है। है ना? जो करता है। तमोगुण जो तामसिक शक्तियों के साथ रहता है। उग्र शक्तियों के साथ रहता है। क्रोध जिसे ज्यादा रहता हो। सतोगुण जो सात्विक तरीके से चलता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो यह तो आधार ही है ना चलाने में असुर शक्ति तमोगुण में थी जी अगर असुरों का अस्तित्व नहीं होता ठीक है तो आज माताओं के इतने रूप कैसे निकल के आते हम रक्त बीज को मारने के लिए देवी पार्वती को काली नहीं बनना पड़ता जी ठीक है महिषासुर को मारने के लिए महिषासुर मर्दिनी नहीं बनती जी तो हर एक चीज के पीछे कोई ना कोई कड़ी जुड़ी होती है ठीक है। यह चैन है, यह सर्कल है। घूमता रहता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम अच्छा अभी आपने जैसे कहा कि ये एंटिटीज किसी के अंदर आती हैं और वो प्रिटेंड करती हैं कि वो भगवान है, देवी हैं। तो आपके पास कोई ऐसा केस है तो बताइए जब आपके सामने यह हुआ हो। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हां बिल्कुल हुआ है। इसमें अधिकतर छलावा भी काम करते हैं। हम ठीक है। प्रेत भी काम करते हैं। अब किसी ने एक मुसलमान ही प्रेत चलाया हुआ था। हम ठीक है। अब मुसलमानी प्रेत जो चला हुआ था ठीक है? वो लड़की पे आके गलत कार्य करना होता है। परेशान करना है ना? ये सब चीजें होती हैं। अब जिस पे बीतती है वो जानता है। अब सामने वाला तो कह देता है ये क्या चल रहा है। भगवान ना करे किसी के घर में किसी की बहन बेटी के साथ या किसी भाई के साथ, पुत्र के साथ यह घटनाएं घटे। लेकिन जिसके घर में यह चीजें जाती हैं या बिगाड़ती हैं तो पता चलता है कि क्या होता है। फिर उसमें क्या है? अगर आपको इन चीजों से सुरक्षित रहना है तो वारा अवतार हैं जो विष्णु भगवान उनकी सेवा करनी चाहिए। ओके हां वारा अवतार से मुसलमानी तंत्र बिल्कुल दूर रहता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओके हां इसका कोई पर्टिकुलर रीज़न है?

बिल्कुल है। हम वारा को वो अच्छा नहीं समझते हैं। वारा उनके में नापाक है। दिस इज द रीज़। अभी जैसे हमने इन एंटिटीज की बात करी है। आपने कभी कर्ण पिशाचनी को देखा है कि वो दिखती कैसे है? उसकी अपीयरेंस कैसी है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

देखो हर एक चीज ना यह जो होती हैं हम इनका असली मूल रूप देखोगे तो बहुत भव्य है। लेकिन अगर कई बार ये दर्शन में दिख जाए तो बहुत सुंदर भी हैं। अच्छा हां दो रूप होते हैं। बदलने में सक्षम होते हैं। अब वहीं डाकनी आप का अगर मैं बताऊं तो डाकनी के जो बाल है ना ठीक है ना? वो पैरों से नीचे हैं हम और दिगंबर स्वरूप है ठीक है और देवी को बहुत प्रिय है अच्छा डाकनी शाकनी हाकनी हम इनकी हर एक का ना अपना ज़ोन है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हर एक की अपनी ताकत है। ठीक है? अगर आपकी भाषा में समझाऊं तो नॉर्मल इंसान की भाषा में कोई वर्कर होता है, कोई सीनियर मैनेजर होता है, कोई डायरेक्टर होता है। तो इसी प्रकार भूत, प्रेत, पिशाच, डाकनी, साकनी, क्षेत्रपाल इनके अपने-अपने ओदे हैं। हम अपनी-अपनी ताकत है। किसी को थोड़ा दिया गया है, किसी को ज्यादा दिया गया, कई किसी को बहुत ज्यादा दिया गया है। हम और साधक एक ऐसा है जो इन सबको अपने साथ ले चलता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हां। तो अभी जैसे आपने इन एंटिटीज की बात करी है। आप डाकिनी और हाकिनी के बारे में बताएंगे कि यह क्या होती हैं और इन इनका क्या काम होता है? जैसे आपने बताया इनको एक पर्टिकुलर काम सौंपा जाता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

डाकिनी देखिए मां के अंश से निकला हुआ ही एक उनका स्वरूप है। उन्हीं के साथ रहने वाली उनकी सहचारनिया कह लो। ठीक है? उनकी सेविका कह लो। ठीक है? डाकनी हो सकती है। ठीक है? और हमारे तंत्र शास्त्र के अनुसार हमारे लिए वह पूजनीय है। ठीक है? उसमें इतनी क्षमता होती है कि वो ब्रह्मांड की ऊर्जा को भी इधर-उधर कर दे भगवती के आशीर्वाद से। ओके? हां। वो किसी भी चीज को करने में समर्थवान है। चाहे वो ब्रह्मांड में हो या वो मृत्यु लोक पे हो। वो इतनी ताकतवर होती हैं। ओके। एंड हाकिनी आकनी उसी के साथ चलती हैं। ये तीनों एक साथ चलती हैं। हम ठीक है ना? और इसके बाद योगनियां आ जाती हैं। आपकी 64 योगनियां बताई गई हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

और हर योगिनी अपना-अपना जैसे किसी को पैसा चाहिए, किसी को अट्रैक्शन चाहिए। हर योगिनी का अपना दायित्व है। और योगनियां मां की एक सहचारनी सहेलियां बताई गई हैं। ठीक है? ये मां के साथ चलती हैं। इनमें दो मुख्य होती हैं। अज्या और विजय। हम हां यह योगनियां हो गई। अब इसी के साथ-साथ तंत्र का छोटा सा थोड़ा सा ज्ञान दे देता हूं क्योंकि डीप जाना मना होता है तंत्र के बीच में क्योंकि शिव ने स्वयं बताया गया है हमारे तंत्रशास्त्र में कि इसे को पात्र को दें पात्र को मत दें। पात्र को जो यह ज्ञान देता है, इसकी गहराई समझाता है, वह इसका फल जरूर भोगता है। एक जनरल नॉलेज के लिए बेसिक नॉलेज होनी चाहिए। BKarnpisachini Brahmarakshah aur

लेकिन इसके डीप का ज्ञान नहीं देना चाहिए। तो इसी में 52 वीर आ जाते हैं। ठीक है? जो मां के आगे चलते हैं। मां की सेवा करते हैं। हर एक मां का अपना एक वीर होता है। ठीक है? नरसिंह देव का नरसिंह वीर है। ठीक है? काली मां का कलवा वीर है। हम ठीक है। हरिया वीर है। ठीक है। तो ऐसे ये वीर होते हैं। ओके। मसान का मसानिया वीर है। ठीक है? कालिया मसान वीर है। ये अधिकतर लोग इनको वीरों को जो चलाते हैं ये अधिकतर गलत कार्यों के लिए चलाए जाते हैं। हम क्योंकि जब इन्हें सिद्ध किया जाता है तो वचन यही लेते हैं। इन्हें भोग प्रसाद पे उतारने के बाद वचन ये लिए जाते हैं। जो कार्य बोलूंगा तू करेगा। और वचनों का बहुत बड़ा खेल होता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

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एक बार वचन में बंध गए तो चाहे वो सही हो, चाहे वो गलत हो। उन्हें वो करना ही पड़ेगा। लेकिन इसका कर्म का फल कौन भोगता है? साधक। ओके। आज मैंने कोई चीज सिद्ध कर रखी है या मेरे साथ कोई आशीर्वाद है। मैं उसे सही में चलाऊंगा या गलत में चलाऊंगा। चला तो मैं रहा हूं। बुद्धि मेरी काम कर रही है। उसे वचन में लेके अगर मैं जबरदस्ती कुछ उससे गलत करवा रहा हूं और वह कर रहा है। तो वो अपना रास्ता ढूंढेगा भी आपसे निकलने का। हम ठीक है? और आपको फंसाएगा भी कहीं। ओके। कहां फंसाएगा? अब कोई उससे बड़ी एंटिटी ले बैठा है। हम वो उसके वहां फंसा देगा। आप गलती से उधर की तरफ चलाओगे वो उसे बांध के फ्री कर देगा। ओके। तो वो वहां से मुक्त हो गया ना। क्योंकि ये एंटिटियां भी नहीं चाहती गलत में चले। Karnpisachini Brahmarakshah aur

इन एंटिटीज को सिद्ध वैसे पैसों के लिए करते हैं। लोग फेम के लिए करते हैं। यह ना एक नशा होता है। हमारी लाइन में इसे नशा कहते हैं। हर एक को एक ऊर्जा चाहिए अपने साथ। ठीक है? हमारे में पैसा नशा नहीं होता है। हमारे में नशा होता है। ऊर्जा किसके पास कितनी है? हम ठीक है? कितने पॉजिटिव हैं, कितने नेगेटिव हैं। यहां शक्ति प्रदर्शन लोग ज्यादा करते हैं। ठीक है? और शक्ति प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। सेवा करनी चाहिए। जी। ठीक है? आपके पास आई। आपने सेवा करी। आपने सिद्ध किया। आपने अपने कर्म से सिद्ध किया। लेकिन अब उसे सही जगह पे लगाना सीखना चाहिए। और सही जगह ही लगाना चाहिए। सही जगह ही लगाना चाहिए। Karnpisachini Brahmarakshah aur

और लगाना क्यों? देखो एक समय ऐसा आता है हमारा शरीर भी छूट जाता है। हम एंटिटियां भी मुक्त हो जाती है। ठीक है ना? तो फिर बांध के क्यों रखना? अपने मोक्ष के लिए बड़े हो। तंत्र का मार्ग मोक्ष का बताया गया है। एंड हां। तो मोक्ष का रास्ता पकड़ो। धीरे-धीरे सब चीजें छूट जाती हैं। आज आप साकार मूर्ति की पूजा कर रहे हो। जब आप धीरे-धीरे आपका लेवल अप होगा, आप निराकार की तरफ बढ़ जाओगे। निराकार से एकांत में चले जाओगे। एकांत से कंधरा में विराजमान करो। फिर संसार आपको सिर्फ देवी में लगेगा। हम और जब देवीम में लगता है तो कुछ चाहिए क्या? Karnpisachini Brahmarakshah aur

जी बिल्कुल। अच्छा जैसे अभी हमने इतनी सारी एंटिटीज की बात करी है। बागेश्वर धाम के जो धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी हैं वो काफी लोग बोलते हैं कि उनके पास कोई एक एंटिटी है। उन्होंने सिद्ध कर रखी है। वो उनको बताती है। आपकी राय जानना चाहती हूं। आपको क्या लगता है क्या एंटिटी है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

फिर मैं आपको जवाब दूंगा इसका। मुझे तो लगता है उनके ऊपर हनुमान जी की कृपा है। एंड वो बताते हैं हम जी। उनके दादा गुरु की उस स्थान पे समाधि है। हम ठीक है ना? दादा गुरु का आशीर्वाद है। ठीक है? हनुमान जी की कृपा तो साथ में है ही। सीताराम की कृपा भी है। लेकिन उन्होंने अच्छे के लिए किया। चीजों को अच्छा किया। है ना? लोगों को एक मार्ग दिया। है ना? तो वहां पर जो भी चीज है जो आप सोचते हैं वो कृपा है, Karnpisachini Brahmarakshah aur

आशीर्वाद है। कई लोग उसे सिद्धि मांगते हैं। ठीक है? वो उसके गुरुओं का आशीर्वाद है। उन्होंने उस तप से कमाया, उस साधना से कमाया और पॉजिटिव रखा, गलत में नहीं दिया। तो आज वो वहां तक हैं। कई लोग कहते हैं कि बागेश्वर धाम के पास कर्ण पिशाचिनी है। जहां साक्षात बागेश्वर बाबा बैठे हो। हम ठीक है। जो जहां सीताराम नाम का उच्चारण चलता हो। ठीक है? जहां हनुमान जी की सेवा होती हो। वहां पिशाच क्या करेगा? वहां वो हनुमान जी की सेवा करेगा। हां वह कुछ और नहीं कर सकता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

पिशाचनी वहां टिक भी नहीं सकती है। नहीं टिक सकती है। हम तो यह भ्रांतियां है। जितना मर्जी फैला लो। देखो सच तो यही है ना जो सच है जहां सकारात्मक ऊर्जा है वहां नकारात्मक नहीं रहेगी। हम ठीक है? तो ये चीजें समझने वाली हैं। पिशाच का वहां क्या काम? जहां पे आरती सुबह शाम होती हो। ठीक है? कथा चलती हो। वहां पिशाच रुकेगा। जैसे वह पर्चे में बता देते हैं कि तुम्हारे साथ यह होने वाला है तो लोग कहते हैं Karnpisachini Brahmarakshah aur

कि उनके कान में वह बता देती है। यह एक तरह की हनुमान जी की साधना होती है। ठीक है? हनुमान जी की ये साधना करने के बाद इसके ये अनुभव आते हैं। ठीक है? तो ये हनुमान जी की कृपा से प्राप्त होता है। ये कोई पिशाचिशाच नहीं बताता। ये हमारे तंत्र शास्त्र के हिसाब से यह हनुमान जी की साधना है। आप कह रहे हैं उन्होंने हनुमान जी की ही साधना कर रखी है।

जी उनको देखकर लगता भी है कि उनके ऊपर हनुमान जी की ही कृपा है। जी अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता जी कौन है वो? हनुमान जी सर अब मैं आपसे कुछ पितृ पक्ष के क्वेश्चंस पूछना चाहती हूं क्योंकि अभी श्राद्ध भी शुरू होने वाले हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि अगर हमारे सपनों में हमारे पितर आते हैं और वह भोजन मांगते हैं तो क्या वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहे हैं? इसका अर्थ यह है कि आपने पितरों की ना तो अमावस पूछी। पूजी सॉरी और ना आपने उनका पितृ पक्ष जैसे आ रहे हैं उसकी सेवा करी ना उनका तर्पण किया ठीक है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो वो इसलिए आकर संकेत देते हैं कि आपकी यह गलतियां हैं आप इन गलतियों को सुधारो ठीक है अमावस पे खीर बनानी चाहिए है ना पितरों को भोग लगाना चाहिए ब्राह्मण को भोज कराना चाहिए ठीक है वह हम नहीं कराते हैं तो पितृ दोष लगता है आज 90% लोग अगर कुंडली दिखाएंगे अपनी तो ब्राह्मण सबसे पहले ज्योतिषचार्य आपको यही बोलेगा पितृ दोष है। पितृ दोष है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

पितृ दोष है। और वो पितृ दोष के चक्कर में वो सुनसुन के भी जो बेचारा कुंडली दिखाने जाता है वो भी पक जाता है। हम क्यों? क्योंकि उसको सही उपाय नहीं मिलता है। सही तरीका नहीं मिलता है। सर क्या श्राद्धों में ब्राह्मण को खाना खिलाना सच में सीधा पितरों को लगता है? बिल्कुल लगता है। इसलिए बताया गया है। देखिए अगर हम साधना भी करते हैं। कन्या भोज ब्राह्मण भोज हमारे में भी बताया गया है साधनाओं में कि कराना चाहिए। ब्राह्मण यानी जो ज्ञान रखता हो ब्रह्म का जिसने वेद पढ़े हैं जो आगे का मार्ग देता है। आज हमारे को आगे का मार्ग चाहिए तो वेद पढ़े वही देगा ना जिसने वेदों का अध्ययन किया वही हमारे पितरों को मुक्ति दिला सकता है ना और कौन दिलाएगा? है Karnpisachini Brahmarakshah aur

ना? इसलिए वो पूजनीय होते हैं। यह करना ही चाहिए। करना ही चाहिए। ओके। ओके। और सर शराद में पशु पक्षियों का क्या योगदान रहता है? पशु पक्षियों का योगदान रहता है। देखिए आप उन्हें भोजन करा रहे हैं। जैसे कौवा है हम है ना? कौवे को कहीं ना कहीं हमारे पितरों के साथ जोड़ा गया है। ठीक है? तो उसको जैसे आपने खीर बनाई पितरों के लिए। पितरों को सफेद भोग लगता है। सफेद वस्त्र दान में दिया जाता है। यह भी बहुत जरूरी है जानना। और आप उनके पिंड देखेंगे तो पिंड भी गाय का दूध होता है। है ना? जौ का आटा होता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

इससे बनाए जाते हैं। सफेद हो गए ना है ना? तो शहद डाला जाता है ताकि वो उन तक पहुंच सके। सात्विक रूप से सफेद यानी सात्विक का प्रतीक है। इसलिए हम आपको क्या करना चाहिए? उपाय दे देता हूं। पितृ पक्ष जैसे आ रहे हैं। है ना? पितृ पक्ष में सफेद चावल की खीर बनाएं। ठीक है ना? अपने पितरों का ओम पितृ देवताभ्यो नमः का मंत्र बोल के अपने घर के मंदिर में चाहे भोग लगाएं रख दें थोड़ा सा कुछ उसमें से निकाल के ऊपर छत पे रखा है पक्षियों के लिए ठीक है खीर और बाकी सिर्फ अपना परिवार खाएं बाहर का नहीं खाएं ठीक है और कुछ वस्त्र ले ले सफेद सवा मीटर सवा दो मीटर सवा5 मीटर जितनी क्षमता है देने की कुछ दक्षिणा ले सफेद मिठाई ले ब्राह्मण को मंदिर में देके आए है हम और यह हर अमावस उपाय किया जाए तो अति उत्तम है। पितृ प्रसन्न होते हैं और पितरों की घी की ज्योत लगाएं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओके हां अगर लगा सकता है अमावस के अमावस पितरों की घी की ज्योत लगाएं। पितृ प्रसन्न है तो आप रंग से राजा कब बन जाओगे पता ही नहीं। शिव महापुराण में भी लिखा हुआ है। पितरों का बहुत बड़ा स्थान है। इसलिए पितृ देवता भव कहा गया है। मतलब उन्हें देवों की योनि दी गई है। संज्ञा दी गई है। लेकिन जो हम गलत कार्य कर देखिए कोई गलत कार्य किया किसी ने वो मृत्यु को प्राप्त हो गया। प्रेत योनि में चला गया। अब उनको सही दिशा देने के लिए उनकी मुक्ति के लिए ठीक है। हम ये पितृ पूजा करते हैं। ओके। सर कैसे पता लगेगा कि पितरों की मुक्ति नहीं हुई है? देखिए वह तो कुंडली है। कुंडली आप दिखाते हैं तो उसमें ज्योतिष देख के बोल देता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

ना पितृ दोष लगा हुआ है या किसी साधक के पास जाओगे साधक देख के बोल देगा पितृ दोष लगा हुआ है जाके इलाज कर ले। हम्म। ठीक है। तो वो पता चल जाता। तो सर श्राद्ध के समय क्या पितरों को सिर्फ याद कर लेना काफी है या कुछ करना ही जरूरी है? याद किया आपने वह बात ठीक है लेकिन एक जो नियम पद्धति हमारे शास्त्रों की बनी हुई है उसे करने में क्या बुराई है उसे फॉलो करेंगे आपने याद किया याद किया खत्म हो गया लेकिन आपने उसे नियम से किया उसका रिजल्ट तब मिलेगा ना आपको हम आपने सोचा कि मैं गाड़ी ले लूं ठीक है उदाहरण के तौर पे आनंद आ गया आपको सोचने मात्र से नहीं आया लेकिन जब जब तक आप लोगे और उसे चलाओगे फिर आपको कैसा लगेगा हम दोनों में फर्क है Karnpisachini Brahmarakshah aur

ना यह फर्क है ओके और सर श्राद्ध में दान की क्याेंस होती है दान देखिए पुण्य बताया गया है हमारे शास्त्रों में महापुण्य कन्यादान भी है दान कई प्रकार के हैं कन्यादान भी है भूमि दान भी है ठीक है सोना दान भी है पहले के समय में सोना भी तो दान दिया जाता था। ठीक है? और कई कई साधक ऐसे हैं जिसने अपनी साधना करी और अपने इष्ट को ही समर्पित कर देते हैं। तेरा तुझको समर्पित ये हमारे कर्मों को हमारी आत्मा को शुद्ध रखते हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हमें सकारात्मक रखते हैं। हमारे अंदर अहम नहीं आने देते कि मेरा मेरा मेरा दान करके आप कभी दान करिए या पक्षियों को दाना खिलाइए। आप उस दिन देखिए आपकी ऊर्जा बदली होगी। अंदर से एक पीस फील करोगे आप। पॉजिटिविटी आएगी। यस दान का इतना बड़ा महत्व है कि वो हमारे ही अंदर हमारी चीजों को शांति प्रदान करता है। ओके। सर एक चीज और मैं पूछना चाहती हूं कि क्या शराब सिर्फ बेटे ही कर सकते हैं? हम या बेटियां भी कर सकती हैं? बेटे का ही अधिकार होता है। बेटियां देखिए कन्यादान होके चली जाती हैं। ठीक है? तो उसका जो मायका है Karnpisachini Brahmarakshah aur

वह छूट जाता है। वहां से संबंध खत्म हो जाते हैं। क्योंकि आपने वहां पर देवों को देवियों को साक्षी मान के अग्नि देव को साक्षी मान के सात वचनों में फेरे लिए हैं। अग्नि के फेरे लिए हैं जो अग्नि देव हमारे पंच तत्वों में माने गए हैं। जिन्हें स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त है इंद्रोक देव के साथ। ठीक है? आपने तो वो कन्या दान की जाती है। इसलिए कन्यादानम बताया गया है। ठीक है? जब दान दे दी कन्या तो वो चीज उसकी रही नहीं तो वो नाता वहां से पूरा छूट गया। तो मायके का कुछ भी करने में असमर्थ है। उसका गोत्र भी फिर उसके ससुराल का लगेगा। Karnpisachini Brahmarakshah aur

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ठीक है। उसके जो भी संस्कार हैं ससुराल वाले वो ही चलेंगे। जी। अभी हमने हनुमान जी की बात करी है। ऐसे ही जो और देवी देवता हैं उनके बीज मंत्र होते हैं। स्पेशली जैसे हमारे दश महाविद्या हैं। बहुत सारे लोग होते हैं वो इंटरनेट में देख लेते हैं। YouTube में देख लेते हैं और मजे-मजे में वो मंत्र बोल देते हैं। उनके जो बीज मंत्र होते हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो आप बताएंगे अगर कोई मजे-मजे में ऐसे पढ़ता है तो उसके साथ क्या होगा और अगर कोई रियल केस हो तो उसके बारे में भी बताइए। इसका रियल केस बिल्कुल है। देखिए एक लड़का था 27 28 साल का YouTube पे साधना देखी और जो विधि बताई उसने उस साधना को उठाया और बैठ गया। रात्रि में 11:00 बजे के बाद सरसों के तेल का दिया लगाना। उसमें दो लौंग डालना। ठीक है? अपना जो यंत्र बनाना है मंडल जिसे कहते हैं Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम लोग वह बनाया। ठीक है? उसके बाद माला का उच्चारण करना, जाप करना। उसने एक भाव से उस चीज को करना शुरू कर दिया। जब करना शुरू कर दिया ना तो गुरु हैं ना पूर्ण ज्ञान था तो वो चीजें उसे

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